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बिहार में हवाई क्रांति की उड़ान, 15 एयरपोर्ट्स के विकास से बदलेगी राज्य की तस्वीर

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बिहार में हवाई सफर अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य सरकार ने विमानन क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा और दूरगामी रोडमैप तैयार कर लिया है, जिसके तहत बिहार के 15 हवाई अड्डों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इस मेगा प्लान का मकसद न केवल यात्रियों को बेहतर हवाई सुविधा देना है, बल्कि राज्य को निवेश, पर्यटन और लॉजिस्टिक के नए केंद्र के रूप में स्थापित करना भी है। सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में बिहार की हवाई कनेक्टिविटी देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ी नजर आएगी।
सरकार ने इस पूरी योजना की व्यवहारिकता परखने के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण से विस्तृत फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करानी शुरू कर दी है। रिपोर्ट मिलते ही संबंधित इलाकों में जमीन पर निर्माण, विस्तार और आधुनिकीकरण का काम तेज कर दिया जाएगा। खास बात यह है कि सरकार का ध्यान केवल पटना, दरभंगा जैसे स्थापित हवाई अड्डों पर नहीं, बल्कि उन शहरों पर भी है जहां अब तक हवाई सेवा लोगों के लिए सपना बनी हुई थी।
इस योजना के तहत मधुबनी, वीरपुर, मुंगेर, वाल्मीकिनगर, भागलपुर और सहरसा जैसे शहरों में 19-सीटर छोटे विमानों के संचालन की संभावना पर अध्ययन कराया जा रहा है। इसके लिए सरकार ने एएआई को 2.43 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। उद्देश्य साफ है—छोटे शहरों को बड़े शहरों से जोड़ना और कम दूरी की उड़ानों को व्यवहारिक बनाना। इससे सीमावर्ती और पिछड़े इलाकों के लोगों को राजधानी और अन्य व्यावसायिक केंद्रों तक तेजी से पहुंचने का मौका मिलेगा।
मोतिहारी और छपरा जैसे ऐतिहासिक और व्यस्त शहरों के लिए अलग से व्यवहार्यता अध्ययन कराया जा रहा है, जिस पर 1.21 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। वहीं, बेगूसराय के उलाव और गोपालगंज के सबेया सैन्य हवाई अड्डे को नागरिक उड़ानों के लिए खोलने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। यदि यह योजना जमीन पर उतरती है, तो उत्तर बिहार के बड़े हिस्से को सीधा हवाई नेटवर्क मिल जाएगा।
हवाई अड्डों के विकास में सुरक्षा और तकनीकी मानकों को सबसे अहम माना गया है। भागलपुर के सुल्तानगंज, वीरपुर, मुंगेर, वाल्मीकिनगर, मुजफ्फरपुर और सहरसा में ऑब्स्टेकल लिमिटेशन सरफेस सर्वे कराया जा रहा है। इस सर्वे के जरिए उड़ान मार्ग में आने वाली इमारतों, पेड़ों और अन्य बाधाओं की पहचान की जाएगी ताकि भविष्य में उड़ानों के संचालन में कोई खतरा न रहे। इसके लिए सरकार ने 2.90 करोड़ रुपये की राशि जारी की है।
दरभंगा एयरपोर्ट को सरकार केवल यात्री हवाई अड्डा नहीं, बल्कि उत्तर बिहार का लॉजिस्टिक और कार्गो हब बनाने की तैयारी में है। यहां 50 एकड़ भूमि पर आधुनिक लॉजिस्टिक पार्क और कार्गो टर्मिनल विकसित किया जाएगा, जिस पर 138 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे कृषि उत्पाद, मछली, मखाना और अन्य स्थानीय वस्तुओं को देश-विदेश तक तेजी से पहुंचाने का रास्ता खुलेगा।
सहरसा एयरपोर्ट में रनवे विस्तार के लिए 12 एकड़ अतिरिक्त भूमि पर 147 करोड़ रुपये की लागत से काम किया जा रहा है। वहीं, भागलपुर के सुल्तानगंज में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए करीब 931 करोड़ रुपये की लागत से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। सोनपुर में 4228 एकड़ भूमि पर नए हवाई अड्डे की योजना तैयार की गई है, जबकि रक्सौल और बिहटा में भी विस्तार और विकास के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है।
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से बिहार में हवाई सफर तो आसान होगा ही, साथ ही उद्योग, पर्यटन और व्यापार को भी नई उड़ान मिलेगी। होटल, ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक और सेवा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। राज्य सरकार इसे केवल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि बिहार की आर्थिक दिशा बदलने वाला कदम मान रही है।
अब सवाल यही है कि क्या आपका शहर भी इस हवाई विकास की सूची में शामिल है। अगर योजनाएं तय समय पर जमीन पर उतरती हैं, तो आने वाले वर्षों में बिहार का नक्शा आसमान से भी बदला हुआ नजर आएगा।

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